ये कौन सा सभ्य समाज है (भाग – तीन) – डी के निवातिया

ये कौन सा सभ्य समाज है (भाग – तीन)

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ये कौन सा सभ्य समाज है, ये किस सदी का राज़ हैमानव का मानव दुश्मन, लुप्त प्राय: लोक-लाज है !!

घर में एक दूजे का भान नहींबुजुर्गो का होता सम्मान नहींपत्थर पूजा के हम अनुयायीलेकिन मानवता रास न आयीधर्म-कर्म का नित पाठ सुनातेजाति-पात का नश्तर चलातेजिनसे पाते रोटी कपड़ा और मकानबतलाकर उन्हें अछूत बनते है महानवेद पढ़ ज्ञानी बने मिटा न मन का अभिमाननिर्जीवो में ईश खोजते जीवो का करते संहारकोई हिन्दू, कोई मुस्लिम, कोई सिख, ईसाईधर्म नाम पर निज बटँते है मानवता के भाईये कौन सा सभ्य समाज है, ये किस सदी का राज़ है !मानव का मानव दुश्मन, लुप्त प्राय: लोक-लाज है !!

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डी के निवातिया

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16 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 17/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  2. Rakesh kumar 18/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma 18/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  4. Dr Swati Gupta 18/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  5. Bhawana Kumari 18/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  6. C.M. Sharma 19/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  7. davendra87 19/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018
  8. Shishir "Madhukar" 20/05/2018
    • डी. के. निवातिया 07/06/2018

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