मातृ दिवस – अनु महेश्वरी

एक ही दिन का शोर, खूब मचा था,
मातृ दिवस के नाम पे मंच सजा था।
सब ने अपनी माँ पे खूब प्यार बरसाया,
नई नई कविताओं का हार पहनाया।
काश यह प्यार, यह आदर हमेशा रहे,
माँ के प्रति यह सन्मान दिल से बहे।
न मनाओ कोई मातृ दिवस और अब,
अपनी माँ के लिए इतना करना बस।
बुढ़ापे में उसे वृद्ध आश्रम न छोड़ आना,
अपने ही घर से उसे न पड़े बाहर जाना।
जब तक एक भी माँ को रहना होगा वहाँ,
तब तक यह दिवस मनाना बेमानी है यहाँ।
अनु महेश्वरी

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12 Comments

  1. Dr Swati Gupta 17/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  2. Rakesh kumar 17/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  3. डी. के. निवातिया 17/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  4. C.M. Sharma 18/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018
  5. Shishir "Madhukar" 20/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 21/05/2018

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