“माँ”…सी. एम् शर्मा (बब्बू)

 धागे प्रेम के….कच्चे कहाँ होते हैं…देखो ‘माँ’ ड्योढ़ी पे है खड़ी…अकेली….भूखी…प्यासी….स्थिर काया…एकटुक निहारती…वीरान सी पगडण्डी लगती है उसे…भीड़ इतनी आती जाती में भी…बेखबर दुनियाँ सारी से…ड्योढ़ी पे है खड़ी….अंतर्मन में…पगडण्डी की तरह…कितनी मीलों चल रही है…अकेली…\/सी. एम् शर्मा (बब्बू)

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

14 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 15/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018
  2. mukta 15/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018
  3. Bhawana Kumari 15/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018
  4. ANU MAHESHWARI 15/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018
  5. डी. के. निवातिया 16/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018
  6. Rakesh kumar 16/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018
  7. Dr Swati Gupta 17/05/2018
    • C.M. Sharma 19/05/2018

Leave a Reply