अमृत पान – Bhawana kumari

एक पेड़ की डाली पर मेहमान नया कोई आया था। नौ माह के संघर्ष के बाद तुने मुझको पाया था। मैं भी तुमको देखकर माँमन ही मन मुसकायी थी। तब तुमने मेरी नन्ही हाथो को अपने होठो से लगाया था। सब थे खुशिया बना रहे तुने अपना दर्द छुपा कर मुझको अमृतअमृतपान कराया था।

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14 Comments

  1. डी. के. निवातिया 14/05/2018
    • Bhawana Kumari 15/05/2018
  2. Dr Swati Gupta 14/05/2018
    • Bhawana Kumari 15/05/2018
  3. C.M. Sharma 15/05/2018
    • Bhawana Kumari 15/05/2018
  4. Shishir "Madhukar" 15/05/2018
    • Bhawana Kumari 15/05/2018
    • Bhawana Kumari 15/05/2018
  5. ANU MAHESHWARI 17/05/2018
    • Bhawana Kumari 18/05/2018
  6. Rakesh kumar 17/05/2018
    • Bhawana Kumari 18/05/2018

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