दर्द को जी लेना चाहता हूँ

दर्द मुझे कितनो ने दियासब भूल जाना चाहता हूँदर्द को सीने से लगा कर दर्द को जी लेना चाहता हूँकब किसने सीने पर वार कियाकब किसने पीठ पर खंजर भोंकासब भूल जाना चाहता हूँदर्द को जी लेना चाहता हूँथी भूल मेरी ये गैरो को अपना बनाने कीअपनों ने भी बेरुखी ऐसी कीकी सब अब राख कर देना चाहता हूँमैं अब और कुछ नहींजज्बातो के जंजाल से रिहाई चाहता हूँनींद अगर मौत आने से आयेतो मैं अब मौत चाहता हूँ दर्द को सीने से लगा करदर्द को अपना बना करसब भूल जाना चाहता हूँदर्द को जी लेना चाहता हूँ —अभिषेक राजहंस

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6 Comments

  1. डी. के. निवातिया 14/05/2018
    • Abhishek Rajhans 14/05/2018
  2. Bhawana Kumari 14/05/2018
  3. Shishir "Madhukar" 15/05/2018
  4. rakesh kumar 17/05/2018
  5. ANU MAHESHWARI 17/05/2018

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