आजादी का सपना

खिड़की की उसपार से झांक रही वो दोनों आँखें सपना देखती है अनंत नीले आसमान का सुगंध बिखेरनेवाली हवा की और पंख पसारकर हर्ष और आनंद के साथ उड़ने की पर देखकर भी देख नहीं पाई वह अनंत आसमान भी देश का सीमा रेखा से बाँटा हुआ है और सीमा पार करना सख्त मना है खुली हवा में भी बारूद की गंध ही फैली हुई है हर्ष और आनंद के साथ उड़ने पर दुश्मनों का हिंसुकतीक्ष्ण तीर की धार इंतज़ार में है कोई -कोई सपना देखने में जितना सुन्दर होता है उतना ही मुश्किल होता है सत्य की धरती पर उसकी फसल उगानाफिर भी ‘आजादी ‘और ‘उड़ने का सपना’देखना भूलते नहीं चाहे वह पंक्षी हो औरत हो या खूंटी पर बंधी गाय ही हो

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6 Comments

  1. Bhawana Kumari 14/05/2018
  2. डी. के. निवातिया 14/05/2018
  3. Dr Swati Gupta 14/05/2018
  4. C.M. Sharma 15/05/2018
  5. Shishir "Madhukar" 15/05/2018
  6. ANU MAHESHWARI 17/05/2018

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