चिता

अनल की लपट धधकती झपटदेह कर भस्म निभाती रस्महृदय उदगारजीव की पुकारपीर प्रतिकार खत्म चीत्कारकर्म का लेख नियति उल्लेखजिधर भी देख भ्रम मति रेख ।अनल की लपट हुई है प्रकटकरो स्वीकारसत्य साकारआत्म संगीतबोध का गीतहृदय में झांकपीर को ताकमिला क्या हैगिला क्या हैअनल की लपटदैव की रपटब्यर्थ की ब्याधिअंत है आदितुम्हारा कथ्यतुम्हारा सत्यतुम्ही तुम होकहाँ गुम होनिरख जग बसितत त्वम असि ।देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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3 Comments

  1. डी. के. निवातिया 14/05/2018
  2. C.M. Sharma 15/05/2018
  3. Shishir "Madhukar" 15/05/2018

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