माँ – अनु महेश्वरी

माँ होती है ममता की मूरत,उससे प्यारी न कोई सूरत।बच्चों के सुख में जिसे खुशी है मिलती,उसके मुख से आशीष की धारा है बहती।बच्चों के खातिर जो हर पीड़ा है सहती,फिर भी कभी किसीसे कुछ न है कहती।माँ का वर्णन करू, ऐसे शब्द कहाँ से मैं लाऊँ,माँ के सान्निध्य का सुख और कहाँ से मैं पाऊँ। अनु महेश्वरी

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12 Comments

  1. C.M. Sharma 14/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  2. Bhawana Kumari 14/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  3. डी. के. निवातिया 14/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  4. Dr Swati Gupta 14/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  5. Shishir "Madhukar" 15/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 17/05/2018
  6. mukta 15/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 17/05/2018

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