इबादत-ऐ-इश्क है, तुझसे

इबादत-ऐ-इश्क है, तुझसे
तू्ं‌‌‍‌! हम साये में संजो रही
तेरी! बेकरार, निगाहें
न जाने क्या कह रही
पढ़ लिया न तुझे पूरा का पूरा
लेकिन.. अब भी बहुत कुछ, बाकी है
ता-उम्र गुजार दूं, तेरे साथ
तेरी रजा-ऐ-हामी बाकी है
जब -जब  तूं! मिलती है
तुझे देख, ये दिल खिलता है
तेरे चेहरे की मुस्कुराहट से
मुझे सुकूं मिलता है
“भागचंद डी.निराला “

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3 Comments

  1. Dr Swati Gupta Dr Swati Gupta 10/05/2018
  2. Vipul goswami 10/05/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 11/05/2018

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