अरमान मेरे दिल का …. बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा बिन्दु

अरमान मेरे दिल का अब निकलने नहीं देतेअरमान मेरे दिल का अब निकलने नहीं देतेनाहक मेरे हरीके-बहार मुझे चलने नहीं देते।हम तो गदा-ए-इश्क में अब सब कुछ भुला गयेएक तुम दिलफरेब जो दिल को जलने नहीं देते।मेरे नियाज-ए-इश्क मोहताज-ए-वस्फ वो मसर्रतेंमेरे इशरत-ए-रफ्ता को अब संहलने नहीं देते।जज्बात में जुस्तजू करता रहा अपनी नजाकत सेमेरे अदू जराहते-दिल को अब भी भरने नहीं देते।तुम्हारी तर्ज़-ओ-रबिश लेकर अब मैं क्या करूॅ तिलिस्मे-मजाज जुज्वे मंजर समझने नहीं देते।ये तेरे अहदे-रिया और ये तेरे मोहतसिबे-शहरअफ़सुर्दगी-ओ-जौफ-नेमत में जीने नहीं देते।नहीं दिखती तबई-ए-वलवले किसी भी दिल मेंवक्त-ए-रवॉ मुझे तसकीन से रहने भी नहीं देते।निकले थे हम भी सहल-अंगारी में इस तरह नौमीदी-ए-जावेद नाचार को उबरने नहीं देते।

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  1. Bindeshwar Prasad sharma 09/05/2018

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