माँ जब से मैं मायके से आई हूँ।

माँ जब से मैं मायके से आयी हूँ,शरीर तो यहाँ है मेरा पर मन वहीं छोड़ मैं आई हूँ।तेरे ममता की छांव में शीतलता ऐसी मिली है मुझको,चिंता की अग्नि शांत हुई,सारे दुख बिसराई हूँ।तेरे हाथ का खाना खाकर मन तृप्त हुआ मेरा,अमृतमयी स्वाद चख कर मैं आई हूँ।जिस घर में मेरा बीता था बचपन,उसी बचपन को फिर से मैं यादों में बसाकर लायी हूँ।पापा का प्यार से बातें करना, मेरे पसन्द की चीजें लाना,उनके इस अनमोल प्यार में,मैं सारी खुशियाँ पायी हूँ।भाई बहन के संग छेड़छाड़, वही प्यारी सी तू तू मैं मैं,उनके संग इन चंद पलों में, मै बचपन जी कर आई हूँ।वर्षों बाद मिलन हुआ बचपन की सखियों से,उनके संग फिर से मैं अपना बचपन दोहरा कर आई हूँ।मायके में बीते ये कुछ दिन दे रहें हैं नई ऊर्जा,जिससे मैं जीवन में फिर से नया जोश भर लायी हूँ।इन प्यारे प्यारे लम्हों को दिल में सँजोकर,ममतामयी जादू का पिटारा अपने साथ में लायी हूँ।।By:Dr Swati Guptahttps://youtu.be/Ai4YzbkkENQ

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13 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 09/05/2018
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018
  2. Chandramohan Kisku 09/05/2018
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI 09/05/2018
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018
  4. डी. के. निवातिया 09/05/2018
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018
  5. Bhawana Kumari 09/05/2018
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018
  6. Sushila 09/05/2018
  7. C.M. Sharma 10/05/2018
    • Dr Swati Gupta 10/05/2018

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