तेरी खुशबुओं में घिर गया- शिशिर मधुकर

अभी कुछ दिनों की तो बात है तुम कितने मेरे करीब थे हर शख़्स मुझसे जल गया कुछ ऐसे अपने नसीब थे तुम फूल थे जिस बाग़ के मैं उससे तो गुज़रा नहीं तेरी खुशबुओं में घिर गया जब तुम मेरे हबीब थे माली को प्यार तुझसे था और तेरा श्रृंगार उससे था लेकिन हवा ऐसी चली वो समझा कि हम रकीब थे तोड़ भी लेता तुम्हें मैं अपने आँगन के लिए ऐसा मगर ना कर सका हालात कुछ गरीब थे उस दौर को तू याद कर बैरी हुआ जब ये जहाँ जो साथ में ठहरे रहे मधुकर वो ही मुजीब थे शिशिर मधुकर

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13 Comments

  1. Chandramohan Kisku 09/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/05/2018
  2. Dr Swati Gupta 09/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI 09/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/05/2018
  4. C.M. Sharma 09/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 09/05/2018
      • C.M. Sharma 10/05/2018
  5. डी. के. निवातिया 09/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 10/05/2018
  6. Bhawana Kumari 09/05/2018
    • Shishir "Madhukar" 10/05/2018

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