मेरा परिवार- Bhawana kumari

यह कविता मैं जब 10th class में थी तब लिखी थी। इस बार जब मैं अपने मायके आई थी तो पापा ने मुझे मेरी लिखी कुछ रचनाये दी जिसमें एक रचना है…….- मेरा परिवार माँ पापा और हम है पांच बस सात सदस्यों का मेरा परिवार। मुझसे पहले है न कोई पीछे है दो दो चार। मैं हूं ‘भावना ‘स्नेह की मुझसे छोटा दो है भाई और दो छोटी सी प्यारी बहना। 2) हम पांच थे,पांच है और पांच रहेगे हम नही किसी से अब डरेगे। हम मुरत्त रुप है जिनके उन्ही के चरणों में सदा रहेगे। एक स्नेह की ‘भावना’ है तो दुजा बंटी ,सोनू ,पम्मी ,सिम्मी। हम पांच थे पांच है और पांच रहेगे जिसने हमको जन्म दिया उन्ही के चरणों में सदा रहेगे। अब न हमकभी लड़ेगे हमेशा हम mil जुल कर रहेगे। एक हाथ के पांच ऊँगली हम नहीं है कोई एक समान फ़िर भी हममें कितना प्यार। आओ करे हम अपनी बखानहम पांच थे पांच है और पांच रहेगे।

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20 Comments

    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  1. Dr Swati Gupta 08/05/2018
    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI 09/05/2018
    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  3. C.M. Sharma 09/05/2018
    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  4. Shishir "Madhukar" 09/05/2018
    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  5. Chandramohan Kisku 09/05/2018
    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  6. डी. के. निवातिया 09/05/2018
    • Bhawana Kumari 09/05/2018
  7. Abhishek Rajhans 10/05/2018
  8. Bhawana Kumari 10/05/2018
  9. Bindeshwar Prasad sharma 10/05/2018
    • Bhawana Kumari 10/05/2018
  10. Rakesh kumar 17/05/2018
    • Bhawana Kumari 19/05/2018

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