सीख-हास्य कविता

कई बरस के बाद जिंदगी में दिन ऐसा आया थाजब प्यार मोहब्बत की गलियों में खुद को बेबस पाया थालात घूंसों की ऐसी घनघोर घनी बरसात हुई थीचौराहे पर उस जालिम सेजब पहली बार बात हुई थीखड़ा था इत्मिनान से बस के इंतजार मेंइतने में इक कन्या पहुंचीरूप के खुमार मेंउस नाज़नीं पर आकर नजर टिक गई थीएक पल के लिए जैसे जिंदगी रुक गई थीसोचा कि आज मैं भी तकदीर आजमा लूँउसको जाकर दिल का सारा हाल बता दूंतुम दीपक मैं बातीहम दोनों जनम के साथीसुनकर सारी बात वो थोड़ा सा शरमाई थीरूप माधुरी जैसे यौवन के मद में मुस्काई थीकितने सारे फूल खिल उठे सपनों के बृंदावन मेंदोनों भीग रहे हो जैसे अरमानों के सावन में।सहसा एक पल में मंजर बदल गयापर्दे समेत पूरा दिवा स्वप्न जल गयाये जिंदगी की कौन सी घड़ी से मिल गयाथप्पड़ खा के उसका मै पूरा हिल गयावो वीरांगना लक्ष्मीबाई की भतीजी लग रही थीथप्पड़ जैसे सत्य नारायण का प्रसाद दे रही थीमैं कम नही हूँ किंतु वो जानती नही थीक्रोध के दिये को पहचानती नही थीजब क्रोध के आवेग ने पागल कर दियातो मैंने भी एक जोरदार थप्पड़ जड़ दियाबस उस वक़्त ठहर गई मुझपर सबकी निगाहें बच्चे हो बूढ़े हो या फिर हों बिन ब्याहेहर कोई जैसे उसका संबंधी बन गया जिससे जितना बन पड़ा उतना धर गया।उसके बाद क्या हुआ कुछ पता नही चलाहोश आया तो एक डॉक्टर मुझसे मिलाबोला बड़ी मुश्किल से बचा के समेटा हैअभी खबर नही तुम्हे क्या क्या टूटा है।जरा एक बार तबियत से निहार लोअभी समय है अपनी नीयत सुधार लोमैं बोला एकदम सच्ची बात सुनाता हूँ आज से अभी से यह कसम खाता हूं”कभी किसी अजनबी की तरफ जाऊंगा नहीदिल लाख कहे मगर दिल लगाऊंगा नहीजिनकी किस्मत में केवल पत्थर मारना ही लिखा हैउनकी गली में खुद कोआजमाउंगा नही।।”देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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7 Comments

  1. C.M. Sharma 07/05/2018
  2. डी. के. निवातिया 07/05/2018
    • davendra87 07/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI 07/05/2018
  4. Shishir "Madhukar" 08/05/2018
  5. Bhawana Kumari 08/05/2018
  6. Chandramohan Kisku 08/05/2018

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