जलवा मुहब्बत का – कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु) किसी का मन भटकता है,किसी का दिल मचलता हैये सब रब ही जाने, कब कैसा वक्त गुजरता है ।कोई जल्दी समझ जाता, किसी को देर है लगती कोई उलझन में रहता है, किसी को टेर नहीं लगती। किसी की किस्मत है फूटी,किसी का दिल है टूटा इसे अब कौन समझेगा , मुकद्दर कैसे है रूठा।कहीं जलवा मुहब्बत का, कहीं तकरार है दिल में कहीं इकरार जिगर में तो, कहीं इनकार है दिल में। कहीं रिश्ते नये बनते, कहीं ये खार पुराने हैं दुनिया ऐसे चलती है, यहां किरदार इतने हैं।

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14 Comments

  1. Dr Swati Gupta 07/05/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 07/05/2018
  2. C.M. Sharma 07/05/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 07/05/2018
      • C.M. Sharma 08/05/2018
        • Bindeshwar prasad sharma 08/05/2018
  3. डी. के. निवातिया 07/05/2018
  4. Bindeshwar Prasad sharma 07/05/2018
  5. ANU MAHESHWARI 07/05/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 08/05/2018
  6. Shishir "Madhukar" 08/05/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 08/05/2018
  7. Bhawana Kumari 08/05/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 08/05/2018

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