यही प्यार है – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

कवि – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु) तपन है अगन है चुभन है, यही प्यार है इंतजार है बेताब है बेकरार है, यही प्यार है। तड़प है प्यास है चाहत है, यही प्यार है ख्वाब है शबाब है आफताब है, यही प्यार है। दिवाना है परवाना है अफसाना है, यही प्यार है गुल है गुलशन है शबनम है, यही प्यार है। सावन है पतझड़ है वसंत है, यही प्यार है शरारत है नजाकत है इबादत है, यही प्यार है। सुर है सरगम है गीत ग़ज़ल है, यही प्यार है याद है मुलाकात है इजहार है, यही प्यार है। शोला है शबनम है चमन है, यही प्यार है वफ़ा है बेवफा है दर्द है, यही प्यार है।

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5 Comments

  1. Dr Swati Gupta 05/05/2018
  2. ANU MAHESHWARI 06/05/2018
  3. C.M. Sharma 06/05/2018
  4. डी. के. निवातिया 07/05/2018
  5. Bhawana Kumari 08/05/2018

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