ख्यालों के दरमियाँ – डी के निवातिया

 

ख्यालों के दरमियाँ

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टूटे-फूटे शब्दों के खंगर जोड़-जोड़ करज़ज़्बातो के पत्थरों को तोड़-तोड़ करबनाया था एक मकाँ ख्यालों के दरमियाँगुम गए उसमे सपनो की चादर ओढ़कर !!

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डी के निवातिया

 

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12 Comments

  1. ANU MAHESHWARI 05/05/2018
    • डी. के. निवातिया 16/05/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma 05/05/2018
    • डी. के. निवातिया 16/05/2018
  3. Shishir "Madhukar" 05/05/2018
    • डी. के. निवातिया 16/05/2018
  4. C.M. Sharma 05/05/2018
    • डी. के. निवातिया 16/05/2018
  5. Dr Swati Gupta 05/05/2018
    • डी. के. निवातिया 16/05/2018
  6. Bhawana Kumari 08/05/2018
    • डी. के. निवातिया 16/05/2018

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