गम मेरा – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

ए मालिक गम मेरा मिटा देदर्द दिया जो उसे हटा दे। हम नादान फिसल गये थे फिसलन है जो उसे घटा दे। हम न भटके अपने पथ सेमन में ऐसा ज्ञान अटा दे। धर्म – कर्म मेरा हो सुंदर ऐसा ही कुछ मुझे रटा दे। हो अनर्थ न मुझसे कोई ऐसा चूरन मुझे चटा दे। पर उपकार मीठी हो वाणी जीवन अपना ऐसे कटा दे। लोभ-मोह से दूर ही रखना सब में ऐसी कृति बटा दे।

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5 Comments

  1. C.M. Sharma 05/05/2018
  2. डी. के. निवातिया 05/05/2018
  3. Shishir "Madhukar" 05/05/2018
  4. Dr Swati Gupta 05/05/2018
  5. Bhawana Kumari 08/05/2018

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