खुद से करते रहे वादें – अनु महेश्वरी

गैरो पे कैसे होगा, भला एतबार,जब घायल, अपनो के हाथों हुआ होगा?भरोसा गर चोटिल हो बार बार,फिर दुनिया में, जीना भी दुश्वार होगा|दूर से देख, किसी के बारे में राय,होती है अक्सर, मरू में मृगतृष्णा जैसी,जानने के लिए औरों की मन की स्थिति,जियो ज़िन्दगी पहले उसके ही जैसी|मुस्कुराके जिना, जीवन में समां,मिटा दिल से, नफ़रत और इर्षा,ज़िन्दगी में हरपल समेटें अच्छी यादें,ख़ुश रहने का, खुद से करते रहे वादें| अनु महेश्वरीबेंगलुरु

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13 Comments

  1. C.M. Sharma 04/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 04/05/2018
  2. Dr Swati Gupta 04/05/2018
  3. ANU MAHESHWARI 04/05/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma 04/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 04/05/2018
  5. Bhawana Kumari 04/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 04/05/2018
  6. डी. के. निवातिया 05/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 05/05/2018
  7. Shishir "Madhukar" 05/05/2018
    • ANU MAHESHWARI 06/05/2018
      • ANU MAHESHWARI 06/05/2018

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