हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में

।। हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी में ।।हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी मेंडर- डर के आगे बढ़ते हैं ।चंचल तू हमेशा बनी रहे।तेरे माथे पर न शिकन पड़े ।कुछ झूठा-झूठा हँसते हैं ।तुम को प्रिय खुश रखने कीहम हर पल कोशिश करते हैं ।हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी मेंडर- डर के आगे बढ़ते हैं ।H.D.चैनल चलवा करLED भी फिट करवा करनई तकनीक की मशीनों सेनित अपना घर हम भरते हैं ।पूरी जांबाज़ी से हे प्रिय!हर जुल्म तेरा हम सहते हैं ।हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी मेंडर- डर के आगे बढ़ते हैं ।हर माह फिल्म दिखलाता हूँ ।Shopping भी खूब कराता हूँ ।काम न करना पड़े तुम्हेंनौकरानी का बोझ उठाता हूँ ।Beauty parlour न miss हो जाए कहींकहीं purse न खाली हो जाए!सारी कमाई लाकर प्रिय!तेरे ही हाथ में धरते हैं ।हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी मेंडर- डर के आगे बढ़ते हैं ।श्रोता पक्का मैं बना रहूँ ।जुबान कहीं न खुल जाए।हर dress में unfit हो चाहेतारीफ मेरी fit कर जाए।तेरे over makeup पर भीरसीले शेर हम कहते हैं ।इतने पर भी देखो प्रियमिलने के पल को तरसते हैं ।विरह की आग में जलते हैं ।हे प्रेम तुम्हारी मज़दूरी मेंडर-डर के आगे बढ़ते हैं ।।।।मुक्ता शर्मा ।।

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12 Comments

  1. Bhawana Kumari 02/05/2018
    • mukta 02/05/2018
  2. davendra87 02/05/2018
    • mukta 03/05/2018
  3. C.M. Sharma 03/05/2018
    • mukta 03/05/2018
  4. डी. के. निवातिया 03/05/2018
    • mukta 03/05/2018
  5. Dr Swati Gupta 03/05/2018
    • mukta 03/05/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma 03/05/2018
    • mukta 03/05/2018

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