मजदूर हूँ मजबूर नही- Bhawana kumari

मैं मजदूर हूँ पर मजबूर नही खाता हूँ अपनी खून पसीने की कमाई इसलिए मुझे कोई शरम नही। खा कर सुखी रोटी फुटपाथ पर चैन की नींद सोता हूँ। मिट्टी से सोना उपजाता हूँ ताजमहल और हवामहल भी मैं ही बनाता हूँ। सुरज की किरणों में अपने तन मन को झुलसा कर तिनका तिनका जोड़कर तेरा शीशमहल भी बनाता हूँ ।माना हमारे जीवन में एश और आराम नहीं पर पुरा करता हूँ अमीरों का सपना बहा कर अपना खून पसीना। माना तुम मालिक में हूँ Naukarकहने को एक छोटा लेबर।मेरा भी सम्मान है अपना तेरे सर पर मेरे तन का खून पसीने का उधार बहुत है। तुच्छ न समझना तुम हमे हमसे ही तेरा शीशमहल है। मैं तो हूँ गुरुर अपने देश का चाहे हूँ अनपढ़ या पढ़ा लिखा हूँ मजदूर पर मजबूर नही में ।

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15 Comments

  1. sukhmangal singh 02/05/2018
    • Bhawana Kumari 02/05/2018
  2. Bhawana Kumari 02/05/2018
  3. C.M. Sharma 03/05/2018
    • Bhawana Kumari 03/05/2018
  4. डी. के. निवातिया 03/05/2018
    • Bhawana Kumari 04/05/2018
  5. Dr Swati Gupta 03/05/2018
    • Bhawana Kumari 04/05/2018
  6. Anu Maheshwari 03/05/2018
    • Bhawana Kumari 04/05/2018
  7. Bindeshwar prasad sharma 03/05/2018
    • Bhawana Kumari 04/05/2018
  8. Tarun Kumar 04/05/2018
    • Bhawana Kumari 25/06/2018

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