याद है तुम्हे ?

याद है तुम्हे कब माँ के साथ बहुत प्यार के साथ मुलाकात किया था जीवन की चढ़ाई-उतराईदुःख और कष्टों को सुलझाने के लिए अनुभवी पिता के पास गये हो कब कब अपनी पत्नी की मुस्कान मन लगाकर देखे हो भाभी माँ की निस्वार्थ प्यार को कब अनुभव किये हो कब तारों से आसमान से चन्द्रमा तुम्हारी आँखों की आँगन में आई थी कब सुबह जागने के साथ बेटी की फूल जैसी चेहरा देखे हो और वह स्मरण कर पुरे दिन आनंद के साथ विताये हो मोबाइल और कंप्यूटर की रंगीन दुनिया में तुम्हे होश नहीं है सत्य खो जाने की .

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12 Comments

  1. डी. के. निवातिया 01/05/2018
    • Chandramohan Kisku 01/05/2018
  2. davendra87 01/05/2018
    • Chandramohan Kisku 01/05/2018
  3. Bhawana Kumari 01/05/2018
    • Chandramohan Kisku 01/05/2018
  4. Dr Swati Gupta 02/05/2018
    • chandramohan kisku 02/05/2018
  5. C.M. Sharma 03/05/2018
    • Chandramohan Kisku 04/05/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma 03/05/2018
    • Chandramohan Kisku 04/05/2018

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