याद शहर की यात्रा

शीर्षक–याद शहर की यात्रामनुष्य यात्री ही तो हैघर से निकल कर कहीं दूर जानाकुछ अपनों के साथफिर लौट आनायात्रा का ही तो हिस्सा हैअसंख्य इच्छाओ को मन में पाले हुएअकल्पनीय ,अतुलनीय सी यात्राभावनाओं के वेग में बहकरकहीं दूर बहते जानायात्रा ही तो हैंपहाड़ियों के सीने पर पाँव रखते हुएगंतव्य तक पहुँचने की जल्दी मेंआगे बढ़ते रहनाथकान में सुकून ढूंढनाये यात्रा ही तो हैयात्रा के दौरानकुछ अपनों के संग नोक झोंककभी तकरार कभी करारकभी इनकार कभी स्वीकारये भी यात्रा ही तो हैकुदरत की वादियों का हसीं प्यारईश्वर का अमुल्य उपहारदो पर्वतों के बीच की खाई झाँकना-तांकनाकभी अपनों की फ़िक्र करनाआँखों से उनके अहसासों का जिक्र करनाये यात्रा ही हैकुछ अपनों के साथयादो की तस्वीर खींचनाकभी नजरे बचाना कभी चुराना कभी शर्मा सा जानाकुछ पूछने पर हकला सा जानाये यात्रा ही तो हैकुछ अपनों के साथ यादो कोजीवंत रखने वाली यात्रायाद शहर की यात्रा——–अभिषेक राजहंस

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2 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 23/04/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 26/04/2018

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