शिक्षा, शिक्षा नहीं रही।

शिक्षा, शिक्षा रहीं नहीं,व्यापार बना अब डाला है।मंदिर कहलाता था विद्यालय,अब वहाँ स्वार्थ ने बागडोर संभाला है।व्यवहारिक शिक्षा का पतन हुआ,संस्कार जीवन में कैसे आयेंगे।रटने की पद्धति का जमाना है,नवाचार कैसे कर पायेंगे।साधन नहीं बढ़कर जीवनमूल्य से,सिखलाने वाला गुरु अब रहा नहीं।माँ भी दूसरों से जीतना सिखाती है अब,स्वयं से कैसे जीतें बतलाने वाला कोई मिला नहीं।मनुष्य जीवन हो जायेगा नष्ट,जाकर महापुरुषों से ही कुछ सीख लो।मानवता से बड़ा नहीं कोई धर्म जग में,जीवन मिला परमार्थ को महत्व अब समझ लो ।कवियित्री -आस्था गंगवार ©

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

10 Comments

  1. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 20/04/2018
    • Astha Gangwar Astha Gangwar 21/04/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 20/04/2018
    • Astha Gangwar Astha Gangwar 21/04/2018
  3. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 20/04/2018
    • Astha Gangwar Astha Gangwar 21/04/2018
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/04/2018
    • Astha Gangwar Astha Gangwar 21/04/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 21/04/2018
    • Astha Gangwar Astha Gangwar 21/04/2018

Leave a Reply