आस्तिन का सांप – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आग मत लगाओ, अब दाग मिटाओकुण्डली मार बैठा, नाग भगाओ। आस्तिन का सांप, फन काढ़े बैठा उस दुश्मन का पुराना राग हटाओ। घर से लेकर बाहर तक पहचानोमुदई कहाँ बैठा है इसको जानो। हर एक व्यवस्था में यही हाल हैराजनीति में तो और बड़ा जाल है। पार्टी में चोर उचक्का बेईमान खूनी दबंग राजनीति का अपमान। शासन सुधरेगी तो विकास होगा वर्ना सबके लिए गले का फांस होगा।हत्या अपहरण आम बात हो गई राजनीति धर्म जात पात हो गई लचर कानून बेटी को क्या कहनामानवता आज शर्मसार हो गई।

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5 Comments

  1. C.M. Sharma 19/04/2018
  2. Bhawana Kumari 19/04/2018
  3. डी. के. निवातिया 20/04/2018
  4. Shishir "Madhukar" 20/04/2018
  5. Madhu tiwari 20/04/2018

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