सुकून – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

मुझको फिर से आजमाना चाहती है पता नहीं अब क्या बताना चाहती है। हम तो दूर ही थे उनकी निगाहों सेपास आकर कुछ बताना चाहती है। हम भटक गये थे रास्ते जो थे अपने बखूबी आईना दिखाना चाहती हैहम मायूस देखते ही रह गये उसे वह इन दूरियों को मिटाना चाहती है। सारे गिले शिकवे छू मंतर हो गयेलगता दिल से दिल मिलाना चाहती है। तंहा अब नहीं रहा बिन्दु जमाने में गम खोकर सुकून दिलाना चाहती है।

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6 Comments

  1. davendra87 18/04/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 19/04/2018
  2. C.M. Sharma 19/04/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 19/04/2018
  3. Bhawana Kumari 19/04/2018
  4. डी. के. निवातिया 20/04/2018

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