दिल की आरमां – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

प्यार ऐसा किये कि बदल ही गयेमेरे दिल के आरमां मचल ही गये। था भरोसा नहीं फिर भरोसा किया प्यार मंजिल को पाने निकल ही गये। जिगर में आ गये आँख में बस गयेवक्त आया जो ऐसा फिसल ही गये। एक तड़प दे गयी चैन भी खो गयासाथ उनका मिला तो संहल ही गये। मन सच्चा था साथी जो हम तुम मिले दुआ रब की अब मुझपर फल ही गये।

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