ज़रा खुलने तो दो — डी के निवातिया

ज़रा खुलने तो दो

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शेर सारे पढ़े जायेंगे तुम्हारे मतलब के ज़रा खुलने तो दोबाते तमाम होंगी वफ़ा संग बेवफाई की ज़रा घुलने तो दो !!

हर रंग के गुलों से सजायेंगे, ये महफ़िल तुम्हारी शान मेंमज़ा ना आये गुफ्तगू में कहना, ज़रा मिलने जुलने तो दो !!

दिल सभी के धड़केंगे जब कसीदे परत-दर-परत पढ़े जाएंगेदो पल की मुहलत दो, मुशायरे के माहौल में ढलने तो दो !!

बैठे है कई गुनेहगार इश्क के, पहली से आखिरी सफ़ तककराएंगे हर एक से ख़ुत्बा, ज़रा लबो को हिलने तो दो !!

जह करते हो शिकायत, हकीकत से तुम वाकिफ नहींकरेंगे हम याद फिर से तुम्हे,लब ज़रा हिलने डुलने तो दो !!

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डी के निवातिया

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 ख़ुत्बा – परिचयसफ – पंक्ति/कतार

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22 Comments

  1. davendra87 davendra87 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  2. davendra87 davendra87 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  3. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  5. bhupendradave 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  6. ANU MAHESHWARI Anu Maheshwari 10/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  7. C.M. Sharma C.M. Sharma 13/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 27/04/2018
  8. rakesh kumar rakesh kumar 05/05/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/05/2018
  9. rakesh kumar rakesh kumar 09/05/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/05/2018
  10. rakesh kumar Rakesh kumar 10/05/2018
    • डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 31/05/2018

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