प्रेम और वियोग

हो जाती कैसे अनदेखीगलतियां हुई सब ने देखीकुछ तंज कसेकुछ क्रोध कियेकुछ बात किये कुछ शोध कियेनिज प्रभुता का गुणगान कियेकुछ निंदा रस का पान किये ।।नियम नीति के बाण चलानामुश्किल है उसको समझानावो अड़ी रहीवो डटी रहीसब के सम्मुखवो खड़ी रहीनिज अनुभव का संज्ञान लिएचल पड़ती है मुस्कान लिए ।।उपदेश ज्ञान के न देनाजैसे रहती, रहने देनाकुछ पूंछ रहीकुछ ढूंढ रहीवो देख रहीजो चाह रहीखुद पे ना ऐसे इतरानाजो दर्पण हो सम्मुख जाना ।।उसको मत मानो बस उसमेबंटी हुई है, मुझमे तुझमेंतुम रोते होवो रोती हैमैं रहता हूँवो होती हैखुद से यूँ जो दूर है हम तुमबेबस और मजबूर है हम तुम ।।बंट हर हिस्से में मुस्कानाआसान नही है बंट जानामिली जुली सीखिली खिली सीमधुर मृदुल सीभली भली सीक्षण भर का न समय गंवानाजब भी पास बुलाये आना ।।नही पराजित है अपराजितकाल गति है अति मर्यादितकरुण पुकारवो अश्रुधारहृदय विमुखन सुने चीत्कारविरह वियोग विक्षोभ रहेगाजीवन भर अफ़सोस रहेगा ।। ..देवेंद्र प्रताप वर्मा”विनीत”

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4 Comments

  1. C.M. Sharma 10/04/2018
  2. डी. के. निवातिया 10/04/2018
  3. Shishir "Madhukar" 10/04/2018
  4. C.M. Sharma 13/04/2018

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