सीमा से अपराजिता

देखेगा ज़माना अब अंदाज़ हमारा,
कि किस धूम से हुआ है आगाज़ हमारा,
निश्यच ही सफलता चूमेगी क़दम एक दिन ,
एक दिन विजयी होगा ये विश्वास हमारा ……

हूँ “सीमा” इस असीमित संसार की ,
हूँ कहानी जिंदगी और प्यार की ,
गमों से लड़कर ख़ुशी को जीता है
इसलिए मुझे कहते “अपराजिता “है ,,,,,,,,,,

सीमा वर्मा”अपराजिता”

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