वह गुमनाम हो गई-Bhawana Kumari

जब उसने जन्म लिया,माँ ने एक प्यारा सा नाम दिया। ज्योंहि व बड़ी हुई,दुनिया वालो ने उसे गुमनाम किया। वह कभी मायका बनी,कभी घर बनी। कभी भाई बनी,कभी बहन बनी कभी बिस्तर बनी,कभी रोटी बनी। तो बनी कभी कपड़ा भी। पति के लिए वृक्ष की छाल बनी। बच्चो के लिये पलना बनी। पोते पोती के लिए खुद व बच्ची बनी ।इसी तरह वह गुमनाम होती रही। कभी वह आँगन बनी ,कभी नदी बनी। पहाड़ बनी,परवत बनी। और न जाने व,क्या क्या बनी। और जब वह मरित्यु की सैया सोई ,तो भी वह गुमनाम ही रही ।किसी ने उसे रामप्यारे की पत्नी कहा, किसी ने सोहन प्यारे की बहु कहा।किसी ने चिंटु की माँ कहा तो किसी ने बंटी की दादी कहा । और इस तरह से ,फिर वह गुमनाम हो गई। और किसी ने भी,उसका वह प्यारा-सा नाम नही बतलाया। जो जन्म के बाद,उसकी माँ ने उसे दिया था। और इस तरह से वह सदा सदा के लिए ,गुमनाम हो गई।

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12 Comments

  1. कृष्ण सैनी 07/04/2018
    • Bhawana Kumari 09/04/2018
  2. Chandramohan Kisku 07/04/2018
    • Bhawana Kumari 09/04/2018
  3. डी. के. निवातिया 07/04/2018
    • Bhawana Kumari 09/04/2018
  4. C.M. Sharma 07/04/2018
    • Bhawana Kumari 09/04/2018
  5. Shishir "Madhukar" 07/04/2018
    • Bhawana Kumari 09/04/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma 07/04/2018
    • Bhawana Kumari 09/04/2018

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