दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

सतयुग आयु लाख बरस, त्रितायू दस हजार द्वापर घट हजार भये, कलियुग सौ में भार। करो जितना करना है, ये काया है कांच जाने कब चटक जाये, मानो बिलकुल सांच । कलियुग में श्री राम का, भजन रहेगा सार छल – कपट से दूर रहो, होगा नैया पार।

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9 Comments

  1. C.M. Sharma 04/04/2018
  2. Bhawana Kumari 04/04/2018
  3. Shishir "Madhukar" 05/04/2018
  4. डी. के. निवातिया 05/04/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 05/04/2018
    • Bindeshwar prasad sharma 05/04/2018
      • डी. के. निवातिया 05/04/2018
  5. Bindeshwar Prasad sharma 06/04/2018
    • डी. के. निवातिया 06/04/2018

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