चित्तचोर

सूर्य दिन, रात्रि चंद्र संगउन्माद मिलन का करे हिलोर ।।नियम यही अविरल क्रम से,निरंतर चले है चहुँ ओर ।।सागर गगन छूने को आतुर,लाए अम्बर में घटा घनघोर ।।नाव खेता मांझी उन्मुक्त हो गाता,ठंडी पवन मचाये शोर ।।कब तमन्ना मचल कर हंसेगी,कि पा लिया उसने चित्तचोर।।।।मुक्ता शर्मा ।।

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10 Comments

  1. डी. के. निवातिया 31/03/2018
    • mukta 31/03/2018
  2. Shishir "Madhukar" 31/03/2018
    • mukta 01/04/2018
  3. Chandramohan Kisku 01/04/2018
    • mukta 01/04/2018
  4. Madhu tiwari 01/04/2018
    • mukta 02/04/2018
  5. Bindeshwar prasad sharma 03/04/2018
    • mukta 03/04/2018

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