दुर्मिल सवैया :-चितचोर बड़ा बृजभान सखी ।भाग-2

इक  रूप   अनूप  अनूठ  धरे ।
प्रभु  द्वापर में  अवतार  लिए  ।
 
कर  चक्र  धरे  धनु शारंग को ।
भुज चार सभी हथियार लिए ।
 
मणि कौस्तुभ शोभित थी वक्ष में ।
वनमाला  विभूषित  हार लिए ।
 
मुख श्याम सुशोभित तेज बड़ा ।
चित  चंचल  भाव  उदार लिए ।

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6 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/03/2018
  2. Madhu tiwari 30/03/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma 30/03/2018
  4. mukta 30/03/2018
  5. डी. के. निवातिया 31/03/2018
  6. C.M. Sharma 01/04/2018

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