धर्म

धर्म—————————–‘जिस पल पसीजे, तेरा दिलजिस पल पसीजे, तेरा ज़मीरजिस पल पसीजे, तेरी आत्माउस पल-उस पल- उस पल कोऐ! इंसा ,थाम ले-पकड़ लेमत छोड़संभाल भविष्य की धरोहरऐ मानव!है तेरे ही हाथ ।सोच कि, जो प्रश्न पूछे जाएंगे?सोच कि, जो लेख लिखे जाएंगे?सोच कि,जो शर्म किए जाएंगे?सोच कि,जो सिर झुक जाएंगे?वो ग़ैरों के नहींतेरे न्नहों के सिर होंगे !जिनके कोमल मनतुझसे परे होंगे !और तोतले बोल पूछेंगे !पापा ! जो मारते हैं ,मरते हैं !लड़ते हैं,काटते हैं,कटते हैं !वो जानवरों हैंतो तुम?अपने कर्म विचारो!!अपने धर्म को सुधारो!!सोचतेरे पिता नेजो तुझको उजला धर्म था दिया !!वो तूने मैले चीथड़े-सा कर दिया !!न ओड़ सकें- न छोड़ सकेंये तूने क्या कर दिया?धर्म दिल मांगता है,जान नहीं !धर्म को समझना है तो समझो किजिस पल-जिस पल।।दुखाओगे किसी का दिलधर्म चला जाएगाउसी पल – उसी पल !!।।मुक्ता शर्मा ।।

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10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/03/2018
    • mukta 29/03/2018
  2. Madhu tiwari 30/03/2018
    • mukta 30/03/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma 30/03/2018
    • mukta 24/05/2018
  4. डी. के. निवातिया 31/03/2018
    • mukta 24/05/2018
  5. C.M. Sharma 01/04/2018
    • mukta 24/05/2018

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