दोहे – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

आखर आखर योग से, शबद दिये बनवाय ताल मेल संयोग से, दसो दिशा लहराय। शब्द को संधि कीजिये,उपजे मन की बात जो समझ में आ जाये, कोउ न पूछे जात। मन मीठा पकवान सा, रखे सो मिश्री होय वाणी मधु रस प्रीत की,अमृत सा मन धोय। सांची मन की भावना, रखिये मन में आप औरों का भी हो भला, लगे न कोई पाप। नीयति बिल्कुल साफ हो,न हो क्लेश विकार ए मानस तुम भूल रहे, अपने नेक विचार । ं

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7 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 24/03/2018
  2. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 25/03/2018
    • Madhu tiwari Madhu tiwari 25/03/2018
      • Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 26/03/2018
  3. mukta mukta 25/03/2018
  4. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 25/03/2018
  5. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 28/03/2018

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