बेरुखी -डी के निवातिया

बेरुखी

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करके बेवफाई, खुद को, नज़रें मिलाने के काबिल समझते होबात बात पर देकर दुहाई मुहब्बत कि, हम ही से उलझते होकहाँ से सीखा हुनर, इश्क में रुसवाई का, तूने मेरे सितमगरगैरो पे करम, हम पे सितम करके, तुम बेरुखी से गरजते हो !!

 

डी के निवातिया

 

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16 Comments

  1. Madhu tiwari 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  2. Kiran kapur Gulati 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  3. Anu Maheshwari 21/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  4. Shishir "Madhukar" 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  5. mukta 22/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  6. Bindeshwar prasad sharma 23/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  7. Bhawana Kumari 23/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018
  8. C.M. Sharma 24/03/2018
    • डी. के. निवातिया 28/03/2018

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