वे कभी मरते नहीं..

श्रद्धांजली केदार कोवे कभी मरते नहींजिस क्षण से उनकी देहबंद कर देती है सांस लेनाउसी क्षण से साँसे लेने लगती हैं उनकी कविताउसी क्षण से बातें करने लगते हैंउनके उपन्यास, उनकी कहानी, नाटक के पात्रउनकी तूलिकाएं गीत गाने लगती हैं औरउनकी बनाई तस्वीरें ड्राईंग रूम की दीवारों से उतरकरघर में चहल-पहल करने लगती हैंजोर शोर से, बुलंद आवाज में बतियाते हैं उनके आलेखऔर इस तरह, जिस क्षण आती है उनकी मृत्यु की खबरवे जिन्दा हो जाते हैं अपनी कविता, कहानी, उपन्यास और लेखों, तस्वीरों मेंऔर फिर ज़िंदा रहते हैं अनवरत, अनंत काल तकप्रेमचन्द, परसाईं, नागार्जुन और केदार बनकरअरुण कान्त शुक्ला20/3/2018

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5 Comments

  1. डी. के. निवातिया dknivatiya 20/03/2018
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 21/03/2018
  3. Madhu tiwari Madhu tiwari 21/03/2018
  4. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar prasad sharma 22/03/2018
  5. C.M. Sharma C.M. Sharma 23/03/2018

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