खुदखुशी के मोड़ पर

जिंदगी बिछड़ी हो तुम तन्हा मुझको छोड़ करआज मैं बेबस खड़ा हूँ, खुदखुशी के मोड़ पर ||जुगनुओं तुम चले आओ, चाहें जहाँ कही भी होशायद कोई रास्ता बने तुम्हारी रौशनी को जोड़ कर ||जानता हूँ कुछ नहीं मेरे अंदर जो मुझे सुकून देफिर भी जोड़ रहा हूँ मैं खुद ही खुद को तोड़ कर ||जिस्म को ढकने को हर रोज बदलता हूँ लिबासरूह पर नंगी है कब से मेरे बदन को ओढ़ कर ||#शिवदत्त श्रोत्रियhttp://shivduttshrotriya.blogspot.in/2018/03/blog-post.html

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6 Comments

  1. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 15/03/2018
  2. Astha Gangwar Astha Gangwar 15/03/2018
    • shivdutt 15/03/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma Bindeshwar Prasad sharma 16/03/2018
  4. Madhu tiwari Madhu tiwari 19/03/2018

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