मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दो

मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दोतुम शब्दों में अर्थ जगाकर संस्कार जगा दो।शब्दों की झंकार तुम्हीं होप्राणों की हुँकार तुम्हीं होश्रद्धा का विस्तार तुम्हीं होकरुणा की पुकार तुम्हीं हो।झंकृत कर मधुर स्वर तुम अपनी वीणा केमेरे भी गीतों में श्रद्धा की गूँज निखार दो।खगवृन्दों के स्वर गुंजन कीकिलकारी गीतों में भर दोले भ्रमरों से यौवन उन्मादशब्द पुष्प में कुछ रस भर दो।चेतनता की प्रखर प्रभा से आलौकित करनेकवि के मृदु हृदय में शक्ति का संचार करा दो।मस्त पवन के प्रणय तेज कोगीतों में परिभाषित कर दोअमृत-सा नित चुम्बन बरसातीपंक्ति सभी क्रीड़ारत कर दो।चुन श्रद्धा सुमन सभी कल्पलोक की बगिया सेपूजा में अर्पित पुष्पों का अंबार लगा दो।मेरे गीतों की पंखुड़ियों कोतेरे चरणों पर झरने दोपाकर महक चरणकमलों कीसारतत्व इनमें रमने दो।मेरे गीतों के शब्दों में श्रंगार सजा दोतुम शब्दों में अर्थ जगाकर संस्कार जगा दो।…. भूपेन्द्र कुमार दवे00000

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

3 Comments

  1. Kiran kapur Gulati 16/03/2018
  2. Bhawana Kumari 16/03/2018
  3. Bindeshwar Prasad sharma 16/03/2018

Leave a Reply to Bhawana Kumari Cancel reply