फितूर है

जाने ज़ेहन में ये कैसा फितूर है,गलती है ये तेरी या मेरा कुसूर है,लिए चला है दिल खुद को राहे-मुहब्बत में,हशर की सोच तुझे टूटना जुरूर है,हर लहजे में मेरे लोग ऐब ढूँढ़ते है, मदहोशी है पी जो तेरी आँख से सुरूर है,सब्र की दौलत बख्शी है खुदा ने मुझे,दुनिया कहती है देखो कितना मगरूर है,कद शख्सीयतों का नापने का इक ही पैमाना है,योगी देखो कौन महफिलों में कितना मशहूर है

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6 Comments

  1. Bhawana Kumari 06/03/2018
    • Yogesh 08/03/2018
  2. Kiran kapur Gulati 08/03/2018
    • Yogesh 08/03/2018
  3. Bindeshwar prasad sharma 09/03/2018
    • योगेश 10/03/2018

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