सुने आँगन में- Bhawana kumari

मैं तो घूमता रहता हूँ अकेला ही सुने आँगन में

मेरे  आँखो को था उसका इंतजार।न जाने कब आकर व हमें गले लगायेगामेरे अकेलेपन को दूर bhgaega, व तो मस्त है अपने पत्नी बच्चों के बीचअपना एक अलग दुनिया बसाने मे।उसे फिक्र नही मेरी थोड़ी भीमैं हूँ या नही इसकी उसे खबर भी नही।मैं तो घूमता रहता हूँ अकेला ही सुने आँगन मेकभी अंधेरे कमरे मे डर भी जाता हूँ।कभी चाँदनी रातों में तारे से बातें करता हूँअपनी दुख किससे कहूँ जब अपनों ने ही dhokha दिया है।मेरी नजर ने उसे पहचानने का bhul किया हैमेरी आँखें अरसे से उस गली को देख रही हैजिससे कभी आता था वह दोड़ता huaa ।आकर  लटक जाता था हमारे गले मेमैं डरता नही हूँ अकेलेपन से कभी।पर बाप हूँ फिक्र रहती हैं उसकी हमेंअकेलेपन से नही,डरता हूँ समय के चाल से मे ।कही वह भी नही घूमे सुने आँगन मे अकेले कभीबाप हूँ इसलिए दुआ करता हूँन जाए छोड़कर  उसके बच्चे उसे कभी।मैं तो घूमता रहता हूँ अकेला ही सुने आँगन मे।

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6 Comments

  1. mukta 05/03/2018
  2. Bhawana Kumari 06/03/2018
  3. C.M. Sharma 10/03/2018
  4. Bhawana Kumari 14/03/2018
  5. Anu Maheshwari 18/03/2018
  6. Bhawana Kumari 19/03/2018

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