बचपन वाली होली

याद आती हैआज वर्षो बादवो बचपन वाली होलीजब माँ निपती थीआँगन को गोबर सेमिट्ठी के चूल्हे पेछनते थे मालपुएऔर सारे बच्चे घर केइंतज़ार करते थे की कब उन्हें कुछ मिलेदादा की सफ़ेद धोतीहम गुलाबी कर देते थेहम बच्चे सुबह सुबह हीकूच कर जाते थेजैसे कोई जंग पर जा रहे होगोबर, कीचड़ ,रंग गुलालकभी कोई हरा हो जाताकभी किसी को कर देते लालयाद आती हैआज वर्षो बादवो बचपन वाली होलीवक़्त ने कुछ ऐसे धोया रंग कोहोली तो रहीपर रंगों वाली नहींटाइल्स लगे फर्श परहोली का रंग मिलता ही नहींना रंग होता है घर मेंपकवानो से वो स्वाद आता ही नहींज़िन्दगी में आगे बढ़ने की चाहत मेंइतना उलझ गया हूँ कीजिन दोस्तों को रंगो में डुबोता थाउन्हें “हैप्पी होली” का सन्देश भी भेजा नहींआज कंप्यूटर स्क्रीन केसामने बैठे–बैठे याद आ रहीवो बचपन वाली होली.

Оформить и получить экспресс займ на карту без отказа на любые нужды в день обращения. Взять потребительский кредит онлайн на выгодных условиях в в банке. Получить кредит наличными по паспорту, без справок и поручителей

2 Comments

  1. Sukhmangal Singh sukhmangal singh 04/03/2018
  2. Bhawana Kumari Bhawana Kumari 04/03/2018

Leave a Reply