हाइकु – बिन्देश्वर प्रसाद शर्मा (बिन्दु)

देखो आकाश टेसू के रंग लाल जिया बेहाल। फूले पलास हाय रे मधुमास गोरी के आस। बसंती हवा होली के हुड़दंग पिया के संग। मन को मोहे फागुन के गुलाल दिल को जोड़े। दुश्मन हारे आके गले मिलाए प्रेम पुकारे। संग में खाए गुलाल मन भाए होली आए। मारे ठहाका होली के हुड़दंग वाह रे काका।

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8 Comments

  1. C.M. Sharma 26/02/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 28/02/2018
  2. Madhu tiwari 26/02/2018
    • Madhu tiwari 27/02/2018
      • Bindeshwar Prasad sharma 28/02/2018
    • Bindeshwar Prasad sharma 28/02/2018
  3. Kajalsoni 27/02/2018
  4. डी. के. निवातिया 27/02/2018

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