आज भी – शिशिर मधुकर

शोखी है कितनी आज भी तेरी अदाओं में मुझको सुकूं मिलता है बस तेरी सदाओं में तू नहीं ग़र साथ मुझको धूप लगती है तेरा संग ले आता है मुझको घटाओं में मुँह से कुछ बोले नहीं तुम उम्र भर मुझसे लेकिन मुहब्बत देखी मैंने तेरी खताओं में कुछ इस कदर तुमने चमन आबाद कर दिया खुशबू तेरी फैली है बस सारी फ़िज़ाओं में शिकवे बहुत हैं दूरियां तुमने भी बना लीं मुझको मगर एतबार है तेरी वफाओं में तुम चाहो भी लेकिन जुदा तो हो ना पाओगेशिव सा बसा रखा है मैंने तुमको जटाओं में तुम ज़िन्दगी चाहे किसी भी रूप में देखो हरदम मुहब्बत जीता करी सारी कथाओं मेंबीमार हो जो इश्क़ का वो ठीक हो कैसे मधुकर शफ़ा मिलता नहीं केवल दवाओं में शिशिर मधुकर

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20 Comments

  1. Rajeev Gupta 23/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 23/02/2018
  2. Bindeshwar Prasad sharma 23/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 23/02/2018
  3. yogesh sharma 23/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 23/02/2018
  4. Madhu tiwari 23/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/02/2018
  5. Kajalsoni 23/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/02/2018
  6. C.M. Sharma 24/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/02/2018
  7. ANU MAHESHWARI 24/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/02/2018
  8. bhupendradave 24/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 24/02/2018
  9. Bhawana Kumari 06/03/2018
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2018
  10. kiran kapur gulati 08/03/2018
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2018

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