ग़ज़ल( बीते कल को हमसे वो अब चुराने की बात करते हैं)

सजाए मौत का तोहफा हमने पा लिया जिनसेना जाने क्यों वो अब हमसे कफ़न उधार दिलाने की बात करते हैंहुए दुनिया से बेगाने हम जिनके इक इशारे परना जाने क्यों वो अब हमसे ज़माने की बात करते हैंदर्दे दिल मिला उनसे वो हमको प्यारा ही लगताजख्मो पर वो हमसे अब मरहम लगाने की बात करते हैंहमेशा साथ चलने की दिलासा हमको दी जिसनेबीते कल को हमसे वो अब चुराने की बात करते हैंनजरें जब मिली उनसे तो चर्चा हो गयी अपनीन जाने क्यों वो अब हमसे प्यार छुपाने की बात करते हैंग़ज़ल( बीते कल को हमसे वो अब चुराने की बात करते हैं)मदन मोहन सक्सेना

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2 Comments

  1. Madhu tiwari 20/02/2018
  2. Kajalsoni 22/02/2018

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