धर्म और कट्टरता

धर्म और कट्टरता में बहुत अंतर होता है। धर्म जहाँ आपस में मिल कर रहना सिखाता हैं तो वही धर्म के प्रति कट्टरता आपसी एकता हो नष्ट करती हैं। वह इंसान जो अपने धर्म के अनुसार जीवन जीता है, जो अपने धर्म का पालन करता है, वह कभी भी धर्म के नाम पर नहीं लड़ेगा। वह तो सब में एक खुदा को देखेगा। और वह इंसान जिसकी सोच कट्टरता वाली होती है,जिसके अनुसार सिर्फ उसका धर्म ही सबसे अच्छा है, उसने शायद अपने धर्म को अच्छे से समझा ही नहीं होता। आजकल देश में कट्टरता बहुत बड़ रही है। आज जरूरत है कि हम धर्म को समझे।

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3 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/02/2018
  2. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/02/2018
  3. Kajalsoni 22/02/2018

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