ज़िन्दगी

बहुत उदास सी रहने लगी है जिन्दगी,हर सोच से अब परे है जिन्दगी,हम तो तस्वीर बनाते जातें हैं,जाने क्या रंग भरे जिन्दगी,मिलेगी कभी तो पूछेंगें जरूर,कया चाहती है हमसे ए जिन्दगी,कल जो बहुत दूर तक पीछा किया हमनें,इक मोड पे जा के खो गई जिन्दगी,मिली थी कभी गीली लकडी की तरह,जलाया तो धूआं करने लगी जिन्दगी,आग तो नजर आ सकी योगी,पर आंखें तर कर गई जिन्दगी,

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9 Comments

  1. Madhu tiwari Madhu tiwari 20/02/2018
    • yogesh sharma योगेश 23/02/2018
  2. Kajalsoni 21/02/2018
    • yogesh sharma योगेश 23/02/2018
  3. C.M. Sharma C.M. Sharma 22/02/2018
    • yogesh sharma yogesh sharma 23/02/2018
  4. डी. के. निवातिया डी. के. निवातिया 22/02/2018
    • yogesh sharma योगेश 23/02/2018

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