सभी मतलब के रिश्ते हैं – शिशिर मधुकर

तुम्हारे प्यार की खातिर अदावत मोल ली मैंने ग़मों की पोटली खुद के लिए ही खोल ली मैंने मुझे मालूम था ये आंधियां घर को उजाड़ेंगी ना जाने क्या हुआ फिर भी ये खिड़की खोल ली मैंने देख के रुख ज़माने का हुए थे दूर सब तुमसे मगर तब भी तो मीठी बात तुमसे बोल ली मैंने मुझे तन्हा ना छोड़ोगे कहा करते थे तुम मुझसे झूठ हर बात वो तेरी लहू में घोल ली मैंने कोई अपना नहीं होता सभी मतलब के रिश्ते हैं मधुकर ये सच्ची बात अब फिर तोल ली मैंने शिशिर मधुकर

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18 Comments

  1. Bindeshwar Prasad sharmaकक 14/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/02/2018
  2. C.M. Sharma 15/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 15/02/2018
  3. shivdutt 15/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 16/02/2018
  4. ANU MAHESHWARI 16/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 16/02/2018
  5. Rajeev Gupta 17/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 17/02/2018
  6. Kajalsoni 17/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 17/02/2018
  7. Dknivatiya 19/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/02/2018
  8. Madhu tiwari 20/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 21/02/2018
  9. Bhawana Kumari 06/03/2018
    • Shishir "Madhukar" 08/03/2018

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