जाने क्यों – शिशिर मधुकर

मुहब्बत में घिरे जो भी यही अंजाम हो जाए तड़प ले उम्र भर की और सारा चैन खो जाए कभी ना दर्द से जिनका रहा हो वास्ता कोई उनके आंसू छलकते हैं जो उल्फत बीज बो जाए इसके बिन ज़िंदगी कैसी यहाँ वीरान होती हैये तो समझेगा वो इसकी उलझती राह जो जाए मिले सच्ची मुहब्बत ग़र किसी इंसान को हरदम फिर वो तन्हा नहीं तड़पेगा और रातों को सो जाएमोती बिखरे पड़े हैं ज़िन्दगी के जाने क्यों मधुकर कोई तो प्रेम धागे में इन्हे आकर पिरो जाए शिशिर मधुकर

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18 Comments

  1. Bhawana Kumari 09/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/02/2018
  2. Kajalsoni 09/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/02/2018
  3. Madhu tiwari 10/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/02/2018
  4. Bindeshwar Prasad sharmaकक 11/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 11/02/2018
  5. C.M. Sharma 12/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 12/02/2018
  6. ANU MAHESHWARI 12/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 12/02/2018
  7. आनन्द कुमार 12/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 13/02/2018
  8. Rajeev Gupta 17/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 17/02/2018
  9. Dknivatiya 19/02/2018
    • Shishir "Madhukar" 19/02/2018

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